फ़िल्म जहाँ ऊपरी तौर पर एक कॉमेडी है, इसकी परतों में ईरान के कई सामयिक और सांस्कृतिक मुद्दे उभरते हैं. बड़ी ख़ूबी से ये बात उठती है कि औरतों की आज़ादी जैसे मुद्दों को एक आम ईरानी मज़हब के जरिये ही देखे ये ज़रूरी नहीं. बल्कि अक्सर वह उसे सामाजिक संदर्भों से उपजे कॉमन सेंस के जरिये देखता है.
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Tuesday, July 03, 2007
ऑफ़साइड (2006) - ईरान
Offside (Iran, Persian)
कमाल का प्रयोग. फ़िल्म ईरान और बहरीन के बीच खेले गए पिछले फ़ुटबॉल विश्व-कप योग्यता मैच के साथ-साथ चलती है. कहानी और पात्रों का व्यवहार मैच की घटनाओं से प्रभावित होता रहता है. और फ़िल्म वहीं मैच के बीच शूट की गई है. डॉक्यूमेंटरी-नुमा फ़िल्मांकन के बीच कई कलाकारों का अभिनय बेजोड़ है. सोचिये अगर तो अन्दाज़ा लगाना मुश्किल है कि फ़िल्म और इसकी कहानी कैसे सोची गई होगी. योजना और इम्प्रोवाइज़ेशन के बीच कितने कमाल का इंटरऐक्शन रहा होगा. इतने इम्प्रोवाइज़ेशन के बाद इतनी दिलचस्प फ़िल्म बना पाना ही जफ़र पनाही की सफलता है.
फ़िल्म जहाँ ऊपरी तौर पर एक कॉमेडी है, इसकी परतों में ईरान के कई सामयिक और सांस्कृतिक मुद्दे उभरते हैं. बड़ी ख़ूबी से ये बात उठती है कि औरतों की आज़ादी जैसे मुद्दों को एक आम ईरानी मज़हब के जरिये ही देखे ये ज़रूरी नहीं. बल्कि अक्सर वह उसे सामाजिक संदर्भों से उपजे कॉमन सेंस के जरिये देखता है.
फ़िल्म जहाँ ऊपरी तौर पर एक कॉमेडी है, इसकी परतों में ईरान के कई सामयिक और सांस्कृतिक मुद्दे उभरते हैं. बड़ी ख़ूबी से ये बात उठती है कि औरतों की आज़ादी जैसे मुद्दों को एक आम ईरानी मज़हब के जरिये ही देखे ये ज़रूरी नहीं. बल्कि अक्सर वह उसे सामाजिक संदर्भों से उपजे कॉमन सेंस के जरिये देखता है.
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