tag:blogger.com,1999:blog-3626331.post1182409211158405949..comments2007-07-04T12:39:12.714-04:00Comments on चित्र: ऑफ़साइड (2006) - ईरानv9ynoreply@blogger.comBlogger3125tag:blogger.com,1999:blog-3626331.post-82492164238196917762007-07-04T12:39:00.000-04:002007-07-04T12:39:00.000-04:00आलोक,चोरी तो काफ़ी पहले पकड़ी गई थी, बस अख़बारों (...आलोक,<BR/>चोरी तो काफ़ी पहले पकड़ी गई थी, बस अख़बारों (नारदों पढ़ लो) की नज़र में नहीं आई. शुरू किए तो सदियाँ (2002 में कभी) हो गईं. तुम्हारी बताई फ़िल्म ध्यान नहीं आ रही. तुम्हें और कुछ याद आए तो बताना.<BR/><BR/>गौरव,<BR/>सही कहा. आखिर लगभग सारी दुनिया के पारंपरिक सामाजिक ढाँचे कमोबेश पुरुष-पक्षीय ही हैं.v9yhttp://www.blogger.com/profile/07973018577021600722noreply@blogger.comtag:blogger.com,1999:blog-3626331.post-61305047221936735432007-07-03T23:50:00.000-04:002007-07-03T23:50:00.000-04:00सामाजिक सन्दर्भों से उपजा कामन सेन्स प्रायः 'पितृस...सामाजिक सन्दर्भों से उपजा कामन सेन्स प्रायः 'पितृसत्तात्मक' ही होता है(या बेहतर है यूँ कहें बन दिया जाता है.)Gaurav Prataphttp://www.blogger.com/profile/03777092483108808550noreply@blogger.comtag:blogger.com,1999:blog-3626331.post-20241010418802082462007-07-03T23:20:00.000-04:002007-07-03T23:20:00.000-04:00कब से लिख रहे हो यहाँ चोरी छिपे? :) एक क्यूबन फ़िल...कब से लिख रहे हो यहाँ चोरी छिपे? :) एक क्यूबन फ़िल्म देखी थी, माता पिता अमेरिका चले जाते हैं बेटे को छोड़ कर और फिर कई सालों बाद वापस आते हैं। सन होगी १९८६ या १९८७। नाम ध्यान नहीं आ रहा।आलोकhttp://www.blogger.com/profile/03688535050126301425noreply@blogger.com